महात्मा ज्योतिराव फुले के विचार और मारवाड़ी माली-सैनी समाज का भविष्य
– धर्मेंद्र सुंदेशा
महात्मा ज्योतिराव फुले केवल एक समाज सुधारक नहीं थे, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा, आत्मसम्मान और संगठन के महान चिंतक थे। उन्होंने शिक्षा को समाज की उन्नति का सबसे प्रभावी साधन माना। उनका विश्वास था कि कोई भी समाज तभी प्रगति कर सकता है, जब उसके प्रत्येक व्यक्ति—विशेषकर महिलाएँ, गरीब और वंचित वर्ग—शिक्षित, जागरूक और संगठित हों।
आज मारवाड़ी माली-सैनी समाज आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से प्रगति की दिशा में अग्रसर है, किंतु अभी भी अनेक क्षेत्रों में व्यापक कार्य की आवश्यकता है। ऐसे समय में महात्मा फुले के विचार समाज के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकते हैं।
महात्मा फुले का मानना था कि अज्ञानता सभी सामाजिक समस्याओं की जड़ है। इसलिए समाज को चाहिए कि वह प्रत्येक परिवार में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान करे। केवल सामान्य शिक्षा ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, शोध, प्रशासनिक सेवाओं, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, न्यायिक सेवाओं तथा उद्यमिता के क्षेत्रों में भी समाज के युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए।
महिला शिक्षा और सशक्तिकरण महात्मा फुले एवं माता सावित्रीबाई फुले के विचारों का प्रमुख आधार था। प्रत्येक बालिका को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना, महिलाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित करना तथा समाज की सफल महिलाओं को प्रेरणा स्रोत के रूप में प्रस्तुत करना समय की आवश्यकता है।
महात्मा फुले ने संगठित समाज की शक्ति को समझा और सत्यशोधक समाज की स्थापना के माध्यम से सामाजिक जागृति का कार्य किया। इसी प्रकार मारवाड़ी माली-सैनी समाज को भी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत सामाजिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक नेटवर्क विकसित करने की आवश्यकता है। समाज के शिक्षित, अनुभवी एवं सफल व्यक्तियों को युवाओं के मार्गदर्शन के लिए आगे आना चाहिए।
आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज छात्रवृत्ति कोष, पुस्तकालय, कैरियर मार्गदर्शन केंद्र, प्रतियोगी परीक्षा सहायता केंद्र तथा डिजिटल शिक्षा मंच स्थापित करे, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थी भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें। साथ ही, समाज के डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, शिक्षक, प्रशासक, अधिवक्ता तथा उद्यमी समय-समय पर युवाओं का मार्गदर्शन करें।
महात्मा ज्योतिराव फुले के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उन्नीसवीं सदी में थे। यदि मारवाड़ी माली-सैनी समाज शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, संगठन, आत्मसम्मान, सामाजिक जागरूकता और आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्रों में फुले के सिद्धांतों को अपनाता है, तो समाज निश्चित रूप से नई ऊँचाइयों को प्राप्त करेगा।
महात्मा फुले का संदेश केवल शिक्षित बनने का नहीं, बल्कि शिक्षित होकर समाज को शिक्षित, संगठित और सशक्त बनाने का है। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
धर्मेंद्र सुंदेशा
बी.ए. (ऑनर्स), एम.ए., एम.फिल. (राजनीति विज्ञान)
पीएच.डी. शोधार्थी, दिल्ली विश्वविद्यालय
* पूर्व रेजिडेंट, हिंदू कॉलेज हॉस्टल, दिल्ली विश्वविद्यालय
* पूर्व रेजिडेंट, ग्वेयर हॉल हॉस्टल, दिल्ली विश्वविद्यालय
* पूर्व रेजिडेंट, इंटरनेशनल स्टूडेंट्स हाउस, दिल्ली
धर्मेंद्र सुंदेशा सामाजिक न्याय, शिक्षा, जाति विमर्श, लोकतंत्र, सामाजिक आंदोलनों एवं सामाजिक परिवर्तन से संबंधित विषयों पर अध्ययन, शोध एवं लेखन कार्य कर रहे हैं।