व्यवसाय में ऋण लेते समय किन बातों का रखें विशेष ध्यान
— सीए प्रशांत सुंदेशा
आज के प्रतिस्पर्धात्मक व्यावसायिक वातावरण में वित्त (Finance) किसी भी व्यवसाय की रीढ़ माना जाता है। चाहे नया व्यवसाय प्रारंभ करना हो, व्यवसाय का विस्तार करना हो, मशीनरी खरीदनी हो अथवा कार्यशील पूंजी (Working Capital) की आवश्यकता हो, अधिकांश व्यवसायियों को किसी न किसी समय बैंक अथवा वित्तीय संस्थाओं से ऋण, कैश क्रेडिट (CC Limit) या अन्य वित्तीय सुविधाओं की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में ऋण लेने से पूर्व कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
सबसे पहले व्यवसायी को अपनी वास्तविक वित्तीय आवश्यकता का सही आकलन करना चाहिए। कई बार आवश्यकता से अधिक ऋण लेने से अनावश्यक ब्याज भार बढ़ जाता है, जबकि कम ऋण लेने से व्यवसाय की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इसलिए ऋण की राशि का निर्धारण व्यवसाय की जरूरतों और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए।
ऋण आवेदन से पूर्व व्यवसायी को अपने वित्तीय अभिलेख (Financial Records) व्यवस्थित रखने चाहिए। आयकर रिटर्न, जीएसटी रिटर्न, बैलेंस शीट, लाभ-हानि खाता, बैंक स्टेटमेंट, स्टॉक विवरण तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज अद्यतन और सही होने चाहिए। बैंक ऋण स्वीकृति के दौरान इन दस्तावेजों का विशेष महत्व होता है।
इसके अतिरिक्त व्यवसायी को अपने व्यवसाय की व्यवहार्यता (Business Viability) और भविष्य की योजना का स्पष्ट खाका तैयार करना चाहिए। बैंक यह जानना चाहता है कि ऋण का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा तथा उसकी पुनर्भुगतान (Repayment) क्षमता कितनी है। एक सुव्यवस्थित प्रोजेक्ट रिपोर्ट अथवा बिजनेस प्लान ऋण स्वीकृति की संभावना को बढ़ाता है।
व्यवसायियों को ऋण की शर्तों, ब्याज दर, प्रोसेसिंग शुल्क, सुरक्षा (Collateral), गारंटी तथा पुनर्भुगतान अवधि का भी सावधानीपूर्वक अध्ययन करना चाहिए। केवल कम ब्याज दर देखकर ऋण लेना उचित नहीं है, बल्कि सभी शर्तों को समझना आवश्यक है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यवसायी को समय पर ऋण की किश्तों और ब्याज का भुगतान करना चाहिए। नियमित भुगतान से बैंकिंग साख (Creditworthiness) मजबूत होती है तथा भविष्य में अतिरिक्त वित्तीय सुविधाएँ प्राप्त करने में आसानी रहती है।
एक सफल व्यवसाय के लिए वित्तीय अनुशासन उतना ही आवश्यक है जितना परिश्रम और दूरदर्शिता। उचित योजना, पारदर्शी लेखांकन तथा समय पर अनुपालन (Compliance) के माध्यम से व्यवसायी आसानी से बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेकर अपने व्यवसाय को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है।
सीए प्रशांत सुंदेशा,
चार्टर्ड अकाउंटेंट, जालोर